जागना - सोना नहीं है
उम्र भर रोना नहीं है .
कितने रंगी ख्वाब हों -
पर नींद में खोना नहीं है .
नभ से अच्छी छत है और
धरा सी सेज अच्छी
ईंट गारे के मकाँ में -
कैद अब होना नहीं है .
तैर करके पार जाना
अब मेरा मुमकिन नहीं है
नाव लहरों के सफ़र में -
सिन्धु सा होना नहीं हैं .
सर टिकाकर रो सकूं मैं
ना कहीं कान्धा कोई है .
नींद भर कर सो सकूं मैं .
अब कोई कोना नहीं है .
रब मेरा राखा मुझे वो
दे ही देगा जो भी चाहूँ .
चाहे कोई ना मिले पर
अब तेरा - होना नहीं है .
उम्र भर रोना नहीं है .
कितने रंगी ख्वाब हों -
पर नींद में खोना नहीं है .
नभ से अच्छी छत है और
धरा सी सेज अच्छी
ईंट गारे के मकाँ में -
कैद अब होना नहीं है .
तैर करके पार जाना
अब मेरा मुमकिन नहीं है
नाव लहरों के सफ़र में -
सिन्धु सा होना नहीं हैं .
सर टिकाकर रो सकूं मैं
ना कहीं कान्धा कोई है .
नींद भर कर सो सकूं मैं .
अब कोई कोना नहीं है .
रब मेरा राखा मुझे वो
दे ही देगा जो भी चाहूँ .
चाहे कोई ना मिले पर
अब तेरा - होना नहीं है .
No comments:
Post a Comment