Friday, January 13, 2017

रुका आँखों का पानी है

तुम्हारी बात सुननी है
 व्यथा अपनी सुनानी है
ख़त्म होती नहीं यारो
बड़ी अनबुझ पहली है
बड़ी अद्भूत कहानी है

बड़ी रोई है छिपछिपके
 मेरी ये जिंदगानी है
बहाये नीर जीवन भर
बड़ी खामोश ये आँखें
अभी तो मुस्कुरानी है

दिलासा देने आये हो
अभी कुछ देर तो ठहरो
अभी तो रात बाकी है
बड़ी मुश्किल से सुखा है
रुका आँखों का पानी है

Friday, January 6, 2017

धूपमे छाया हुआ हूँ

मूलधन उतरा नहीं जी
ब्याज में आया हुआ हूँ .
चौंच तोते की लगी है -
फल पका खाया हुआ हूँ .

नकद जैसा भी नहीं हूँ -
किश्त पर लाया हुआ हूँ .
दूर खुद से भी किया ना -
नाही अपनाया हुआ हूँ .

जिन्दगी लूट सी गयी है
मौत का साया हुआ हूँ .
मैं दिहाड़ी पर नहीं हूँ
सेलरी पाया हुआ हूँ .

मत उलझ सुलझे नहीं
त्रिगुणी माया हुआ हूँ .
शीत में कोहरा घना हूँ
धूप में छाया हुआ हूँ .