Saturday, August 27, 2016

हमने भी मुस्कुराना सीख लिया .



कोई जोश गर्माइश भी नहीं 
फासले उनसे बढ़ाना सीख लिया
बनी ना कभी उम्र भर जिनसे -
उनसे हमने निभाना सीख लिया .


भूला चुके थे जिन्हें मुद्दतों पहले -
इनको फिर आजमाना सीख लिया
बात जो कह ना सके थे लबसे -
प्यार हमने जताना सीख लिया .


ग़मों पे अपने ठहाके -
लगाना सीख लिया . 
लबों पे तेरे जो हंसी देखी  - 
हमने भी मुस्कुराना सीख लिया .

Thursday, August 25, 2016

आज से सारा मेरा कश्मीर है .

हम उठे - आकाश बौना सा लगे
धरा जाने क्यों बिछौना सा लगे .
काम मुश्किल ना लगे जग में कोई
जगत बच्चों का खिलौना सा लगे .

हो रहा है वो जो होना सा लगे
ना हुआ - संशय सलौना सा लगे
हवा से हल्का हुआ है दिल मेरा
ख्वाब माला में पिरोना सा लगे .

ना कोई तकदीर ना तदबीर है
आज मेरे हाथ में शमशीर है
अरि टकराया तो सीना चीर है
आज से सारा मेरा कश्मीर है .

Tuesday, August 23, 2016

याद रखना .

जो मुखर हो बोलते हैं -
रोक लेंगी क्या हवाएं 
रास्ता क्या रोक लेंगी -
कुञ्ज की कोमल लताएँ .
शक्ति के वो पुंज धूमिल -
हो ना जाए याद रखना .


बोलते जो हैं पखेरू 
ध्यान से सुन लो जरा 
आज आखेटक यहीं हैं 
श्री हरी को याद रखना 
गर कभी मिल जाएँ तुमको 
तुम यही फ़रियाद रखना 

क्षणिकाएं

छेडदी हैं लहरियां सुर तानमें
मस्त भ्रमरा है अभी मधुपान में
क्या हुआ अंजाम सोचेंगे कभी
गीत मैंने गा दिया है कानमें .

आज बासंती पवन यूँ कानमें 
जाने मेरे क्या कह गयी .
रेत की दीवार फिरसे ढह गयी 
छत अधर आकाशमें यूँ रह गयी .

बहारों से क्या शिकायत
अब उन्हीं सहरों में हूँ .
चंद पल तुम संग बिताये
फिर उन्हीं पहरों में हूँ .

जीना भी बड़ा जरुरी है
जाने कैसी मजबूरी है - 
मंजिल तो नहीं मिली लेकिन
ना सफ़र थका ना पाँव थके


ना मंजिल है ना रस्ता है
सफ़र को दिल तरसता है
ये बंजारों की बस्ती में - 
सदा फिर कौन बसता है .



Monday, August 15, 2016

पर कभी लहरा नहीं हूँ

एक सागर प्रेमका हूँ -
मैं कोई सेहरा नहीं हूँ .
तैरने आ जाओ यारा -
मैं बहूत गहरा नहीं हूँ .

बात कह दो हृदय की
अंध मगर बहरा नहीं हूँ .
बेफिक्र फरमाइए जी
प्रहर हूँ पहरा नहीं हूँ

नाम कोई भी रखो तुम
मैं कोई चेहरा नहीं हूँ .
तिरंगा सा हाथ में हूँ -
पर कभी लहरा नहीं हूँ .

पर कभी लहरा नहीं हूँ

एक सागर प्रेमका हूँ -
मैं कोई सेहरा नहीं हूँ .
तैरने आ जाओ यारा -
मैं बहूत गहरा नहीं हूँ .

बात कह दो हृदय की
अंध हूँ बहरा नहीं हूँ .
बेफिक्र फरमाइए जी
प्रहरी हूँ पहरा नहीं हूँ

नाम कोई भी रखो तुम
मैं कोई चेहरा नहीं हूँ .
तिरंगा हूँ हाथ तेरे -
पर कभी लहरा नहीं हूँ .

Friday, August 12, 2016

हम तुरुप की काट होते

अठारह से साठ होते -
तोलते मनसे तुम्हें हम
फिर पुराने बाट होते .

डाकमें खोये हुए ख़त
आज आ जाते कहीं जो
हम क़ुतुबकी लाट होते .

प्रेम के इस खेलमें भी
बादशा इक्का ना बेगम
हम तुरुप की काट होते

युग वही आता हमारा
प्रेमके फिर पाठ होते
बहूत बढ़िया ठाठ होते .

Thursday, August 11, 2016

गीत है पर सार जैसा कुछ नहीं .

चीज़ सारी हैं जहाँ में काम की
कबाड़ा भंगार जैसा कुछ नहीं .

प्यार में इकरार जैसा कुछ नहीं
दुश्मनी में खार जैसा कुछ नहीं .

काएदे तहजीब से मिलते यहाँ
दोस्ती है प्यार जैसा कुछ नहीं .

लोग मेरे से बसे फिर भी यहाँ
देशसे पर प्यार जैसा कुछ नहीं .

महूब्ब्त सड़कों पर बाजारों में है
मजनू लैला जैसा यार कुछ नहीं .

मंदिरों मस्जिद में जिसको पूजते
खुदा या करतार जैसा कुछ नहीं .

भक्त हैं पर भार जैसा कुछ नहीं
प्रभु में संसार जैसा कुछ नहीं .

वक्त कैसा आ गया है दोस्तों
गीत है पर सार जैसा कुछ नहीं .