Sunday, December 18, 2016

अबे पागल हो गया है

अबे पागल हो गया है -
ये तख्ते - दिल्ली है .
सरकार नहीं बनी अभी
कुर्सी कहाँ मिली है .

कैसे जोड़ बिठाऊं -
बप्पा मानेगे नहीं
अम्मा को ही पटाऊँ
मुमकिन हैं एकबार तो
सीएम बन जाऊं .

पले पलाये सांड -
हम जैसे - प्रायोजित
सरकारी भांड -
कहाँ मिलते हैं .

हम तो मुफ्त में
गोद जाने को तैयार है
बस आपसे इल्तिजा -
इतनी सी मेरी सरकार है .

Friday, December 16, 2016

आँखमें शोले भी होने चाहिए .

साधनों से जीतना मुश्किल बड़ा
हौसले दिलमे भी होने चाहियें
भौंकने से बात बनती ही नहीं -
शब्द दिल तोले भी होने चाहिए .

यूँ मज़ा परवाज़ का आता नहीं
पंख फिर खोले भी होने चाहियें
आग की बरसात होनी चाहिए
आँखमें शोले भी होने चाहिए .


चुभन फूलों से  नहीं होती सनम
तीर जैसी नौक होनी चाहिए .
कुछ नज़र से बात होनी चाहिए
शब्द बिन बोले भी होने चाहिए


Wednesday, December 14, 2016

संसदी सन्त सब ठाली मिले

कुवांरे 'माल' में ढूंढे हैं दिल
कहीं कोई हूर मतवाली मिले
महूर्त लग्न का निकला नहीं
विधुरको कैसे घरवाली मिले

गिरहकट दे रहा सबको दुआ
किसीकी जेब ना खाली मिले
और सरकार की हसरत यही
मिले राहत मगर जाली मिले

भरोसा अब किसी का क्या करें
मिले जो भी वो मवाली मिले
मेरी बस अर्ज़ इतनी दोस्तों
करू अच्छा नहीं गाली मिले

गया असबाब अब मिलता नहीं
ख़ज़ाने के डकैत रखवाली मिले
सफाई की वही करते हैं बात -
जिनकी जमुनामें जा नाली मिले

एक भी पौद फूलों की नहीं
चमनमें सब हमें माली मिले
गुज़ारे क्या करें हम दोस्तों
करेंसी नोट सब जाली मिले

गटर जैसी नदी बहती रही
नहाते लोग बस खाली मिले
फावड़े ले सभी तो आ गए
न झुग्गी देश में चाली मिले

बोयें क्या एक भी दाना नहीं
जोतते खेत सब हाली मिले
भरोसा अब किसी पर है नहीं
संसदी सन्त सब ठाली मिले

Sunday, December 11, 2016

अंधेरों से रार भी है

रास्ते तकते इरादे -
भटकनों से प्यार भी है .
गलत अंदाज़े लगा मत
घर भी है घरबार भी है .

थोड़ी दिल में है कसक
और थोडा एतबार भी है
मंजिले खोयी कभी ना -
मंजिलों से प्यार भी है .

धूप छाई है जमी पर -
शाम खोयी है यहीं पर
रात की बातें करों मत
यामिनी गद्दार भी है .

चाँद तकता है जहाँ पर
चांदनी फैली कहाँ पर .
उजालों से दोस्ती है -
अंधेरों से रार भी है .

Wednesday, November 30, 2016

ना मोदी सा इतराता हूँ

लिखने से रोटी चलती है
लिखने पे गाली खाता हूँ
मैं भक्त नहीं हूँ मोदी का
मैं आज तुम्हें बतलाता हूँ

अब मेरी छोड़ कहो अपनी
क्यों भौंक रहे पट्टा पहने
न कज़री जैसी बात करू
ना मोदी सा इतराता हूँ

माया ममता पप्पू लालू
मैं सबपे कलम चलाता हूँ
सरहद न खींची है कोई
बेधड़क कहीं भी जाता हूँ

मैं दिलकी बाते करता हूँ
मैं दिलसे तुम्हे सुनाता हूँ
अपनी तो छोटी हस्ती है
फिरभी पहचाना जाता हूँ .

मैं लिखके बातें करता हूँ
मन ही मन में गुर्राता हूँ
मीठी पुड़िया से काम चले
तो टीका नहीं लगाता हूँ .

Saturday, November 19, 2016

कैसे बजे सितार .

जनता भूखी भेड है
नेता रँगे सियार .
चांटे से कुछ न बने
जूते मार उतार .

चलते चलते थक गये
देख करम की मार .
गांधी बदरंग हो गये
कैसे होए उद्धार .

चाहे जैसे जीत हो
दिल ना माने हार .
उतर उतर के चढ़ रह्यो
जैसे जूडी बुखार .

कजरी एकल गीत है
ना गाये दो बार .
झूठे बेसुर गीत हैं
कैसे बजे सितार .

Thursday, November 10, 2016

इनके घरमे भी कोई बीमार होना चाहिए .

दुश्मनो से अब नहीं मनुहार होना चाहिए
चाहे आहिस्ता करो - पर वार होना चाहिए .

लिख दिया है आजका सच सब तुम्हारे सामने
पीड़ितों का कोई पैरोकार होना चाहिए .

सोच शासनकी हमारी समझ में आने लगी
देश का हर नागरिक - लाचार होना चाहिए .

हार पे मंथन - नतीजे सामने हैं दोस्तों
आमजन से सीधा सरोकार होना चाहिए .

जीतका चन्दन नहीं तो हारकी खुशबू सही 
हर गलीमें इत्रका - व्यापार होना चाहिए .

गर विदेशी सैरसे फुर्सत नहीं मिलती इन्हें
इनके घरमे भी कोई बीमार होना चाहिए .

थक गए मीठेसे मोदी मशवरा है दोस्तों
मिठाई के संग थोड़ी खार होनी चाहिए .

हार कर आये इन्हें आराम करने दीजिये
फिर नया इक काफिला तैयार होना चाहिए .

भूख पैसेकी नही मिटती यत्न कर लीजिये
टैक्स का माया पे ना अधिकार होना चाहिए .

मौज़ बाबाओं के जैसी हो नहीं सकती कभी
जेल में भी नायिका का प्यार होना चाहिए .

चाहे अर्जुनसे कहो या खुद पधारो श्यामजी
कुछतो हल्का इस धराका भार होना चाहिए .

चिड़ीमारी से किसी की भूख मिटने से रही 
मांस कौए का हो लेकिन भार होना चाहिए .

देसी मुर्गी शोक से मर जाएँगी फिर दोस्तों 
दाल देसीका नही प्रचार होना चाहिए .

एक मोदी से गुज़ारा अब नहीं है दोस्तों
सैंकड़ों मोदी नया तैयार होना चाहिए .









Wednesday, November 9, 2016

ढूंढ ले मुझको हर जगह हूँ मैं

तेरी हिफाज़त में ही लुटा हूँ मैं
पूछ मत कौनसी जगह हूँ मैं .
ठिकाना कोई एक ठौर नहीं -
ढूंढ ले मुझको हर जगह हूँ मैं .

दूर रह वर्ना जल जाओगी
देख जलती अगन चिता हूँ मैं .
नफरतें ढूँढने नहीं जाओ -
प्रेम पीड़ा में मर मिटा हूँ मैं .

तेरे हिस्से के गम उठायें हूँ
कौन कहता है ग़मज़दा हूँ मैं .
ख़ुशी सा आया बिन बुलाये हूँ
सभी कहते छलावा बला हूँ मैं .

ढूंढ लेते जो दिलमे तड़प होती -
उसी जगह हूँ कहाँ हिला हूँ मैं .
तेरे वज़ूद में हर कहीं छिपा हूँ मैं
क्या बताऊँ अब कहाँ कहाँ हूँ मैं .

Tuesday, November 1, 2016

नंगे पाँव जुराब

नेता वो खोटा नही
जो ना आये हाथ .
खोटों के देखे यहाँ -
बहुविध हमने ठाठ .

राजा सिंहासन सजे
प्रजा दबाये चरण .
अब कैसा धिक्कारना -
जब किया स्वयंवर वरण .

राजाशाही ना हटे -
देखो मत ये ख्वाब
जूतों की बारात में -
नंगे पाँव जुराब .

Wednesday, October 26, 2016

चलो हर हाल में जिया जाए

कामयाब यूँ कोई तदबीर नहीं
कोई बतलाये क्या किया जाए .

हादसों से भरा हुआ जीवन
चलो हर हाल में जिया जाए .


बड़ी मुश्किल से घाव भरते हैं
जख्म अब दिलपे न लिया जाए .

जो मयस्सर नहीं लिबास नए
फटा पैबंद फिरसे सी लिया जाये

कौन सी मौत यहाँ  सस्ती है
ख़ुशी से क्यों न जी लिया जाए

इस से पहले की बत्तियां गुल हों
बिल बिजली का भर दिया जाए

जब कोई दूसरी नहीं मिलती
इश्क बेगम से कर लिया जाए .

Wednesday, October 19, 2016

मुस्कुराना है जरुरी

शेर हो क्या इस तरहसे घास खाना है जरुरी
डांटने के बाद यारा - मुस्कुराना है जरुरी .
जिन्दगी में दुश्मनों से खार खाना है जरुरी
दूरियां चाहे बहूत पर - पास आना है जरुरी .

फरशे संगमरमर पर फिसलते ख्वाब जिनके
खुरदरी कच्ची जमीं उनको दिखाना है जरुरी .
जो लदे हो भार से तो - हिनहिनाना है जरुरी
उनकी हर नादानियों पर मुस्कुराना है जरुरी .

पी नजर से हो भले पर लडखडाना है जरुरी .
बारिशें थमती नही छतरी का लाना है जरुरी .
उफनती बहती नदी पर पुल बनाना है जरुरी .
भूल जाओ एक दिन पर याद आना है जरुरी .

Thursday, September 15, 2016

महक हूँ चन्दन नहीं हूँ

आर्त हूँ क्रंदन नहीं हूँ
अर्चना वंदन नहीं हूँ
भुक्ति हूँ भोगी नहीं हूँ
युक्त हूँ योगी नहीं हूँ

समर से भागा नहीं हूँ
सुसुप्ति में जागा नहीं हूँ
लिप्त हूँ बंधन नहीं हूँ
महक हूँ चन्दन नहीं हूँ

राव जैसा रण नहीं हूँ
भीष्म जैसा प्रण नहीं हूँ
राम जैसा भी नहीं हूँ
देवकी नंदन नहीं हूँ .

शोषितों में भी नहीं हूँ
पौषितों में भी नहीं हूँ
रोषितों जैसा नहीं पर
समन्दर मंथन नहीं हूँ

तय विजय न हार हूँ मैं
खुला यमका द्वार हूँ मैं
हर घडी जो मिट रहा है
स्वप्नमय संसार हूँ मैं

Saturday, September 3, 2016

कल कब आये - पर आज गया .

कुछ पाने को - सब खोना है
नारी जीवन का रोना है .
बाहर पाया - पर घर छुटा
मुरझाया घरका हर बूटा .

गमलों में खिलती फुलवारी
कितनी कुम्हलाई है क्यारी
टूटे सपने गम देते हैं -
घर होटल का भ्रम देते है .

आओ रात्रि विश्राम करो -
भागो सुबह और काम करो .
ना पाया - घरका राज गया .
कल कब आये - पर आज गया .

मरे हुओं को यार क्या रोना .

दिलकी यारा यही गुजारिश है 
खफा मुझसे कभी नहीं होना .
तेरी खुशबुसे गुलज़ार हुआ
मेरे दिलका सनम हरेक कोना .

ना आये आँखों में कभी सपने
ऐसा सोना भी यार क्या सोना .
बहते दृग तोड़ डालें बंद सभी
बूंदकी तरह यार क्या रोना .

ढूंढा तुमको पर ना मिले कहीं 
दिलमें झूठी तसल्ली क्या होना 
पा लिया होता तो खो गये होते - 
कभी पाया न उसका क्या खोना .

जिन्दगी जिन्दा सवाल होती है 
सोच लो जिसका तुमको है होना 
विगत तो भूत बला होते हैं -
मरे हुओं को यार क्या रोना .

Saturday, August 27, 2016

हमने भी मुस्कुराना सीख लिया .



कोई जोश गर्माइश भी नहीं 
फासले उनसे बढ़ाना सीख लिया
बनी ना कभी उम्र भर जिनसे -
उनसे हमने निभाना सीख लिया .


भूला चुके थे जिन्हें मुद्दतों पहले -
इनको फिर आजमाना सीख लिया
बात जो कह ना सके थे लबसे -
प्यार हमने जताना सीख लिया .


ग़मों पे अपने ठहाके -
लगाना सीख लिया . 
लबों पे तेरे जो हंसी देखी  - 
हमने भी मुस्कुराना सीख लिया .

Thursday, August 25, 2016

आज से सारा मेरा कश्मीर है .

हम उठे - आकाश बौना सा लगे
धरा जाने क्यों बिछौना सा लगे .
काम मुश्किल ना लगे जग में कोई
जगत बच्चों का खिलौना सा लगे .

हो रहा है वो जो होना सा लगे
ना हुआ - संशय सलौना सा लगे
हवा से हल्का हुआ है दिल मेरा
ख्वाब माला में पिरोना सा लगे .

ना कोई तकदीर ना तदबीर है
आज मेरे हाथ में शमशीर है
अरि टकराया तो सीना चीर है
आज से सारा मेरा कश्मीर है .

Tuesday, August 23, 2016

याद रखना .

जो मुखर हो बोलते हैं -
रोक लेंगी क्या हवाएं 
रास्ता क्या रोक लेंगी -
कुञ्ज की कोमल लताएँ .
शक्ति के वो पुंज धूमिल -
हो ना जाए याद रखना .


बोलते जो हैं पखेरू 
ध्यान से सुन लो जरा 
आज आखेटक यहीं हैं 
श्री हरी को याद रखना 
गर कभी मिल जाएँ तुमको 
तुम यही फ़रियाद रखना 

क्षणिकाएं

छेडदी हैं लहरियां सुर तानमें
मस्त भ्रमरा है अभी मधुपान में
क्या हुआ अंजाम सोचेंगे कभी
गीत मैंने गा दिया है कानमें .

आज बासंती पवन यूँ कानमें 
जाने मेरे क्या कह गयी .
रेत की दीवार फिरसे ढह गयी 
छत अधर आकाशमें यूँ रह गयी .

बहारों से क्या शिकायत
अब उन्हीं सहरों में हूँ .
चंद पल तुम संग बिताये
फिर उन्हीं पहरों में हूँ .

जीना भी बड़ा जरुरी है
जाने कैसी मजबूरी है - 
मंजिल तो नहीं मिली लेकिन
ना सफ़र थका ना पाँव थके


ना मंजिल है ना रस्ता है
सफ़र को दिल तरसता है
ये बंजारों की बस्ती में - 
सदा फिर कौन बसता है .



Monday, August 15, 2016

पर कभी लहरा नहीं हूँ

एक सागर प्रेमका हूँ -
मैं कोई सेहरा नहीं हूँ .
तैरने आ जाओ यारा -
मैं बहूत गहरा नहीं हूँ .

बात कह दो हृदय की
अंध मगर बहरा नहीं हूँ .
बेफिक्र फरमाइए जी
प्रहर हूँ पहरा नहीं हूँ

नाम कोई भी रखो तुम
मैं कोई चेहरा नहीं हूँ .
तिरंगा सा हाथ में हूँ -
पर कभी लहरा नहीं हूँ .

पर कभी लहरा नहीं हूँ

एक सागर प्रेमका हूँ -
मैं कोई सेहरा नहीं हूँ .
तैरने आ जाओ यारा -
मैं बहूत गहरा नहीं हूँ .

बात कह दो हृदय की
अंध हूँ बहरा नहीं हूँ .
बेफिक्र फरमाइए जी
प्रहरी हूँ पहरा नहीं हूँ

नाम कोई भी रखो तुम
मैं कोई चेहरा नहीं हूँ .
तिरंगा हूँ हाथ तेरे -
पर कभी लहरा नहीं हूँ .

Friday, August 12, 2016

हम तुरुप की काट होते

अठारह से साठ होते -
तोलते मनसे तुम्हें हम
फिर पुराने बाट होते .

डाकमें खोये हुए ख़त
आज आ जाते कहीं जो
हम क़ुतुबकी लाट होते .

प्रेम के इस खेलमें भी
बादशा इक्का ना बेगम
हम तुरुप की काट होते

युग वही आता हमारा
प्रेमके फिर पाठ होते
बहूत बढ़िया ठाठ होते .

Thursday, August 11, 2016

गीत है पर सार जैसा कुछ नहीं .

चीज़ सारी हैं जहाँ में काम की
कबाड़ा भंगार जैसा कुछ नहीं .

प्यार में इकरार जैसा कुछ नहीं
दुश्मनी में खार जैसा कुछ नहीं .

काएदे तहजीब से मिलते यहाँ
दोस्ती है प्यार जैसा कुछ नहीं .

लोग मेरे से बसे फिर भी यहाँ
देशसे पर प्यार जैसा कुछ नहीं .

महूब्ब्त सड़कों पर बाजारों में है
मजनू लैला जैसा यार कुछ नहीं .

मंदिरों मस्जिद में जिसको पूजते
खुदा या करतार जैसा कुछ नहीं .

भक्त हैं पर भार जैसा कुछ नहीं
प्रभु में संसार जैसा कुछ नहीं .

वक्त कैसा आ गया है दोस्तों
गीत है पर सार जैसा कुछ नहीं .

Monday, July 25, 2016

मुझसे मेरा काल पूछे .

क्यों बिका ना सेलमें सच
झूठ हो बेहाल पूछे .
तर्क दे कंगाल पूछे -
क्यों बूरा है हाल पूछे .

जिन्दगी क्या चीज़ है ये
मूंछ का हर बाल पूछे .
वक्त की ढोलक पे यारो
मिलाते सब ताल पूछे .

क्या गवाया पा लिया किया
दिलको बस बहला लिया क्या
क्या दिया मोदीने हमको -
हर नया कंगाल पूछे .

निरुत्तर क्यों हो गया मैं
ये बेढंगी चाल पूछे .
जिन्दगी लौटाओगे कब
मुझसे मेरा काल पूछे .


Friday, July 22, 2016

हर्ज़ नहीं दो घूँट लगाले

नूडल अच्छे बहूत लगेंगे
मोमो पिज़्ज़ा बर्गर खाले .
सुबह सुबह मत अंगडाई ले -
जोगिंग जैसी दौड़ लगाले .

खुली छुट मिली है यारो
जितने चाहे इश्क लडाले .
सुरसे सुरा बनी है प्यारे
हर्ज़ नहीं दो घूँट लगाले .

पाकिस्तानी तो दुश्मन हैं
लंकाई नेपाली हैं ठाले .
विश्व पटल पर खूब दिखेगा
अमेरिका से प्रीत बढ़ा ले .

सोनीमें दम नहीं लगे तो
मोदीके लंगर में खाले
रंग स्वदेशी नहीं जमेगा
प्रतिपक्षी काज़लसे काले

परदेसन नानी लगती है
इंडिया बेगानी लगती है
चोरों की रानी लगती है .
प्रश्न कहाँ तक कोई टाले .

पप्पू बड़ा नहीं होगा जी 
जितने चाहे लाड लडाले 
पैंसठ बरस गवाएं हैं जी 
लक्षण ये सब देखे भाले 

Friday, June 24, 2016

गगनमें उड़ता तिरंगा देखिये .

धर्मकी बातें नहीं करना सनम
तुरत हो जाएगा दंगा देखिये

राजनीति के हमीं तो केंद्र हैं
नहीं लेना हमसे पंगा देखिये

पिट गये जो पीटने आये हमें 
ये अजब गौरखधंधा देखिये

बात स्वार्थ की करो तो ठीक है
आदमी होता चौरंगा देखिये

बहती गंगा में नहाते सब मिले
आदमी को अलख नंगा देखिये

बहुर दिन फिरने लगेगें आपके
देश होता भला चंगा देखिये .

बकरियों सा मिमयाना छोड़दे
संघके संग नरासिंघा देखिये .

सप्तरंगी ये धरा सजने लगी -
गगनमें उड़ता तिरंगा देखिये .

Tuesday, June 21, 2016

अच्छे दिन आने वाले हैं .

चुनावी रणतो जीत लिया
पैरों में अब भी छाले हैं .
हारे सब हुए तलाकशुदा -
नववर मोदीजी वाले हैं .

अब तूफांसे घबराना क्या
लहरों ने जिनको पाले हैं .
जर्जर नौका संग डूब गये
जो नाव चलाने वाले हैं .

कहनेसे बात नहीं बनती
करते हैं जो मतवाले हैं .
पर एक बात तू मान यार -
मोदीजी हिम्मत वाले हैं .

जो कहते नहीं अधाते थे
हम चाय बेचने वाले हैं .
खोटे दिन गये नहीं भैया -
अच्छे दिन आने वाले हैं .

मोदीजी तो अनुकूल गये

ये कांग्रेसी पोती पोते
संसंद में जो ये ना सोते
जनता की फ़िक्र करी होती
यूँ जन आधार नहीं खोते .

चावल से निकले मांड गये
मिश्री के कुंजे खांड गये
कुछ पले पलाए सांड गये -
कुछ नेतासे कुछ भांड गये .

कुछ रुके हुए कुछ चालु से
कुछ आलुसे कुछ लालूसे
कुछ अप्पू से कुछ पप्पूसे
जो चल निकले बिन चप्पू से

ममता हो चाहे जयललिता
मिसमैरिज्म है इनका खलता .
मोदीजी तो अनुकूल गये -
पर पूर्व दक्षिण भूल गये .

Friday, June 17, 2016

जहाँ रस्सी वहां फंदे भी हैं .

धर्म उन्मांद की हद तक
आँख वाले हैं अंधे भी हैं
नफरतें सेलमें उपलब्ध
प्रेम के भाव मंदे भी है

खुले में उड़ते परिंदे भी हैं
इंसान हैं तो दरिंदे भी हैं .
जिन्दगी जीना बेखौफ -
मौत आए चार कंधे भी हैं

खुदा है खुदाके बन्दे भी हैं
मंदिर पुजारी है चंदे भी हैं
जरा बचके चलना दिल मेरे
जहाँ रस्सी वहां फंदे भी हैं .

Thursday, June 16, 2016

यार अब और क्यों खता करना

मुझे दुनिया रुला नहीं सकती
खुदा ने कह दिया हंसाकर ना
दीया सूरज बहुत हैं जलने को
किसीसे तू नहीं जला कर ना

मुझसे ना पूछ प्यार किनसे है
उसी से जाके तू पता करना .
बिछुड़ना लाज़मी लगे तुमको
जबभी जाए मुझे बता कर ना

मेरा रस्ता मंजिल तू ही तो है
फायदा क्या मुझे सताकर ना
माफ़ सब होगये कसूर मेरे -
यार अब और क्यों खता करना

धूल चढ़ जाती है रिश्तों पर भी
झाड़ फानूस सब सफा कर ना
फासले दरमियान दफा कर ना
तू सुबह शाम मिल लिया कर ना

Monday, June 13, 2016

भुक्तियों से मुक्तियाँ का दौर हूँ

विरल जल हूँ आग सा मुहजोर हूँ
मैं नहीं - कुछ और थोडा और हूँ .
आडा तिरछा गोल भी चोकोर हूँ .
हूँ उपेक्षित या काबिले गौर हूँ .

झांझ मंजीरा नहीं ढोलक नहीं .
आस्थाओं के कलश सब पूजते .
भक्त हैं प्रतिमा भी है भगवान भी
मंदिरों में घंटियों का शौर हूँ .

मान लेना -जान लो ये बात प्रभु
मैं तुम्हारे बिन बड़ा कमजोर हूँ .
लापता रहता हूँ मरकरके कभी
भुक्तियों से मुक्तियाँ का दौर हूँ .

भुक्तियों से मुक्तियाँ का दौर हूँ

विरल जल हूँ आग सा मुहजोर हूँ
मैं नहीं - कुछ और थोडा और हूँ .
आडा तिरछा गोल भी चोकोर हूँ .
सदा उपेक्षित या काबिले गौर हूँ .

झांझ मंजीरा नहीं ढोलक नहीं .
आस्थाओं के कलश सब पूजते .
भक्त हैं प्रतिमा भी है भगवान भी
मंदिरों में घंटियों का शौर हूँ .

मान लेना -जान लो ये बात प्रभु
मैं तुम्हारे बिन बड़ा कमजोर हूँ .
लापता रहता हूँ मरकरके कभी
भुक्तियों से मुक्तियाँ का दौर हूँ .

जुर्माना सबका भर देता .

ना रिद्धि ना कोई सिद्धि है .
तू ज्यादा ही कुछ जिद्दी है .
विद्या तो महा अविद्या है .
प्रसिद्धा शतप्रतिशत सिद्धा है

माया साधन है साधक है
वो राधा सब आराधक है
लक्ष्मी की पूजा करो यार
मंदिर पूजा सब बाधक है .

ना दोस्त कहो जी दुश्मन है
ना टस्या है ना मस्या है .
मायापति की वो ही जाने -
माया खुद विकट समस्या है .

माया पाकिटमें होती तो -
जुर्माना सबका भर देता .
जयकारों से जो जय होती -
जाने कितनों की कर देता .

Thursday, June 9, 2016

ताप झरता झारियों से .

खेत सूखे क्यारियों से
महकते गुल झाड़ियों से
तप रही सूरज सी धरती
ताप झरता झारियों से .

दग्ध हैं आशा ह्रदय में
बचके चल दिल खाड़ियों से
पेट की तृष्णा मिटे ना -
काम चलता पारियों से .

ये धधकता सा लगे है
जिस्म सूखे बाड़ियों से .
बहुत सूरज है निक्कमा
इसको काटो आरियों से .

द्वार खुल्ला ना मिले तो
झाँक लो घन बारियों से .
केश लहराओ सखे तुम
खुलके बिखरे नारियों से .

एक तुम आशा किरण हो
मेघ रंग लगता है प्यारा
आओ स्वागत है तुम्हारा
अब तुम्हारा ही सहारा .

वही फिदरत पुरानी है .

ना कोई पूछता हमको
ना अपनी राय जानी है .
वही अंदाज़ हैं अपने -
वही फिदरत पुरानी है .

कसम खाके जो कहता हूँ
वो यारो झूठ कहता हूँ .
कोई कहता रहे कुछ भी -
मैं अपनी धून में रहता हूँ .

किराए दार हूँ यारो
किराया दे नहीं सकता .
जेब रहती सदा खाली -
नया घर ले नहीं सकता .

बड़ा ही आम सा मैं हूँ
कौनसी तू भी रानी है .
नया कुछ भी नहीं यारा -
कहानी ही पुरानी है .

अलग सा दिख रहा हूँ मैं
अलग सा हूँ नहीं लेकिन .

Saturday, June 4, 2016

ना कडुआ हूँ ना दागी हूँ .

तेरे सपने तेरे ही हैं -
मैं इनका दावेदार नहीं .
आ जाएँ मेरी आँखों में -
मैं इसका जिम्मेदार नहीं .

जो झूठ कहूं तो भागी हूँ .
ना चाहूँ कुछ तो त्यागी हूँ .
खट्टा मीट्ठा सा फल यारो -
ना कडुआ हूँ ना दागी हूँ .

मेरी छोटी सी अर्जी है
आगे फिर तेरी मर्जी है .
पाने की आस रखे कोई
वो प्यार नहीं खुदगर्जी है .

खुदको पहले नमन करें हम

पत्थर पत्थर पूजे हमने -
मंदिर मंदिर गमन करें हम .
इससे बेहतर तो है यारो -
खुद को पहले नमन करें हम .

इंसानों की दुनिया है ये
पत्थर में फिर रखा क्या है .
घर पत्थर मंदिर भी पत्थर
पत्थर का दिल पत्थर सा है .

रूठे देव नहीं पिघलेंगे -
ना ऐसा कुछ होने का है .
दीवारे संगमरमर की हों -
चाहे दीपक सोने का है .

हमसे अच्छा बेहतर ना हो
कोई भी इस कायनात में .
वही प्रभु को प्यारा होता -
जिसके दुनिया रहे साथ में .

Friday, June 3, 2016

आज तुमसे कह रहा हूँ .

छोड़ धरती 
आशियाँ सब . 
पंछियों सा -
आज नभ में 
रह रहा हूँ - 
प्यार पिंजरे से
नहीं अब -
आज तुमसे -
कह रहा हूँ .

स्वीकार है

 जीत है -
या हार है . 
इर्ष्या या -
प्यार है .
जो हमें बक्शी गयी 
ये जिन्दगी .
जो भी है -
जैसी भी है -
स्वीकार है .

क्षणिकाएं

खासियत कोई तो है
हममे हुजुर .
वर्ना हम जैसा कोई तो
मिल गया होता .

मैं कोई शीशा नहीं पत्थर नहीं -
सुनो यारा आज तुमसे कह रहा .
मैं कोई दरिया नहीं सागर नहीं -
विरलसा इक स्नेह निर्झर बह रहा .

कह रहें हैं लोग सारे -
था अभी तक तो यहाँ मैं .
ढूंढके सब थक गए हैं 
मर गया जाने कहाँ मैं .

दिल नहीं बच पायेगा अब दोस्तों 
इश्क का उमड़ा समंदर देखिये .
नापका जूता अगर मिलता नहीं -
हर गली हर माल मंदिर देखिये .

दोस्त मेरे क्या बताएं
हीर मेरी पीर सी है .
और कुछ दिखता नहीं - 
तस्वीर में तस्वीर सी है .

कोई तख्ती नहीं
स्याही कलमसे
लिखे हर कोई .
शायरी दिलसे करते हैं -

जलाना दिलको पड़ता है .




Thursday, May 26, 2016

क्या मुस्कुराना छोड़ दें

समंदर माने विनय ना
खुद गवाह श्री  रामजी 
खार दम्भी  दिलको तू 
मीठा बनाना छोड़ दे .

बाँध मत धारे नदीके -
नीर मीठा दें तुझे 
बह रहे दरिया के तू 
स्वछन्द मुहाने छोड़  दे .

जंग निश्चित सामने 
कायर बनो ना पार्थ तुम 
आज झूठे अमन के 
लच्चर बहाने छोड़ दे .

बदल जाता है समय 
जब ठोकरें मारे कोई 
मुसीबत जो आ पड़ी 
क्या मुस्कुराना छोड़ दें   

Tuesday, May 24, 2016

रस्ते से हट गया हूँ .

अब नहीं भारी कसम से
और थोडा छट गया हूँ .
पर्वतारोही नहीं पर
मैं पहाडा रट गया हूँ .

कल मैं सम्पूर्ण था पर
आज थोडा घट गया हूँ .
हूँ जरा नमकीन सा पर
चाटने से चट गया हूँ .

बांटने से बंट गया हूँ .
काटने से कट गया हूँ .
आईने जैसा नहीं पर
रास्ते से हट गया हूँ .

Saturday, April 2, 2016

घरमें दिल बीमार जरुरी है .

ऐसा ना दिल बागी हो जाए कुदरत की भी मार जरुरी है . प्रेम जरुरी माना ये लेकिन - थोड़ी थोड़ी रार जरुरी है . दुश्मन तगड़ा चाहे हो बोदा - लेकिन करना वार जरुरी है खुदा कहीं या राम मिले प्यारे लेकिन इक करतार जरुरी है . नौ सो चूहे खा हज़पे जाए घरमें इक भरतार जरुरी है . जूते चाहे लाख पड़ें यारो लेकिन होना प्यार जरुरी है . यूँ सोलह श्रृंगार जरुरी है नैनों की भी मार जरुरी है . मीठी चितवन धार जरुरी है लड़ने को घर नार जरुरी है . चाहे वो कैसी भी हो यारो अलबेली सरकार जरुरी है . कहते सारे जोगी हो जाओ हम कहते घरबार जरुरी है . जन्नत की दरकार नहीं यारो दोखज़ में भी प्यार जरुरी है . साठ सालका अनुभव कहता है वोटर की भी मार जरुरी है . सोचो अच्छे दिन भी आएंगे मोदी की सरकार जरुरी है . हाल जानने वो भी आएंगे घरमें दिल बीमार जरुरी है .

Wednesday, March 30, 2016

भौर टूटे तारका सप्तक कहो तुम

भौर टूटे तारका -
सप्तक कहो तुम .
प्रेम दुःखका द्वार या -
जातक कहो तुम .

नाद आर्तनाद जैसा
कुछ नहीं है
द्वन्द अंतरद्वंद का
वाचक कहो तुम .

मांगता रहता हूँ अक्सर
नेहका मैं दान यारा
है यही सच प्रेमका -
याचक कहो तुम

पथिक हूँ निर्माणपथ का
अश्व जलते सूर्यरथ का
चाँद में धब्बे बहुत हैं -
चाहे आलोचक कहो तुम

सुन रहा हूँ गौर से मैं
अब कहो तुम .
आज कुछ भी ना छिपाओ
सब कहो तुम .

Friday, March 11, 2016

सतयुग से त्रेता अच्छा था

सतयुग से त्रेता अच्छा था
द्वापरसे कलयुग तक जाओ .
महाकाल इस महापर्व है -
कलयुग की महिमा गाओ .

नेकी बदी साथ पलते हैं
किये कर्म तुरत फलते हैं .
ऐसा कोई काल कहाँ था
जिसमे सद्गुरु संग चलते हैं .

मनसे ध्याये पूण्य मिले पर
मन के सोचे पाप नहीं है .
नाम जपो और पाओ मुक्ति
इससे अद्भुत जाप नहीं है .

Monday, February 15, 2016

खुदा जब मेहरबां होगा .

घडी भर का फ़साना है -
जो सदियों में बयाँ होगा
जमीं ऐसी नहीं होगी -
ना ऐसा आसमां होगा .

हमारा घर वहीँ होगा -
कहीं फिर चाँद तारोंमें .
महकते गुल खिलेगे
देखना कलकी बहारों में

नहीं मेरा पता होगा -
नहीं तेरा निशाँ होगा .
ग़ज़ल ये गुनगुनाता
देखना सारा जहाँ होगा .

महूब्ब्त जिन्दा रहती है
जहाँ में मर नहीं सकती .
जिस्म चाहे जुदा करदे
रूह को कर नहीं सकती

दुआएं दे रहा सबको -
कहें सब फ़रिश्ता होगा
रहमतें तब बरसती हैं -
खुदा जब मेहरबां होगा .