Friday, November 10, 2017

बेकार जैसा भी नहीं हूँ

सहज जैसा भी नहीं
दुश्वार जैसा भी नहीं हूँ
रंजिशों में भी नहीं पर 
प्यार जैसा भी नहीं हूँ

कर रहा हूँ प्यार पर
इकरार जैसा भी नहीं हूँ
शहद जैसा भी नहीं पर
खार जैसा भी नहीं हूँ 

आप जैसा भी नहीं
संसार जैसा भी नहीं हूँ
आजमा के देख लो
व्यवहार जैसा भी नहीं हूँ

रूठता भी मैं नहीं
मनुहार जैसा भी नहीं हूँ
सार जैसा कुछ नहीं -
बेकार जैसा भी नहीं हूँ

Friday, January 13, 2017

रुका आँखों का पानी है

तुम्हारी बात सुननी है
 व्यथा अपनी सुनानी है
ख़त्म होती नहीं यारो
बड़ी अनबुझ पहली है
बड़ी अद्भूत कहानी है

बड़ी रोई है छिपछिपके
 मेरी ये जिंदगानी है
बहाये नीर जीवन भर
बड़ी खामोश ये आँखें
अभी तो मुस्कुरानी है

दिलासा देने आये हो
अभी कुछ देर तो ठहरो
अभी तो रात बाकी है
बड़ी मुश्किल से सुखा है
रुका आँखों का पानी है

Friday, January 6, 2017

धूपमे छाया हुआ हूँ

मूलधन उतरा नहीं जी
ब्याज में आया हुआ हूँ .
चौंच तोते की लगी है -
फल पका खाया हुआ हूँ .

नकद जैसा कुछ नहीं जी -
किश्त पर लाया हुआ हूँ .
दूर भी करते नहीं हैं  -
नाही अपनाया हुआ हूँ .

जिन्दगी लूट सी गयी है
मौत का साया हुआ हूँ .
मैं दिहाड़ी पर नहीं हूँ
सेलरी पाया हुआ हूँ .

सुलझता ऐसा नहीं जी
त्रिगुणी माया हुआ हूँ .
शीत में कोहरा घना हूँ
धूप में छाया हुआ हूँ .

Sunday, December 18, 2016

अबे पागल हो गया है

अबे पागल हो गया है -
ये तख्ते - दिल्ली है .
सरकार नहीं बनी अभी
कुर्सी कहाँ मिली है .

कैसे जोड़ बिठाऊं -
बप्पा मानेगे नहीं
अम्मा को ही पटाऊँ
मुमकिन हैं एकबार तो
सीएम बन जाऊं .

पले पलाये सांड -
हम जैसे - प्रायोजित
सरकारी भांड -
कहाँ मिलते हैं .

हम तो मुफ्त में
गोद जाने को तैयार है
बस आपसे इल्तिजा -
इतनी सी मेरी सरकार है .

Friday, December 16, 2016

आँखमें शोले भी होने चाहिए .

साधनों से जीतना मुश्किल बड़ा
हौसले दिलमे भी होने चाहियें
भौंकने से बात बनती ही नहीं -
शब्द दिल तोले भी होने चाहिए .

यूँ मज़ा परवाज़ का आता नहीं
पंख फिर खोले भी होने चाहियें
आग की बरसात होनी चाहिए
आँखमें शोले भी होने चाहिए .


चुभन फूलों से  नहीं होती सनम
तीर जैसी नौक होनी चाहिए .
कुछ नज़र से बात होनी चाहिए
शब्द बिन बोले भी होने चाहिए


Wednesday, December 14, 2016

संसदी सन्त सब ठाली मिले

कुवांरे 'माल' में ढूंढे हैं दिल
कहीं कोई हूर मतवाली मिले
महूर्त लग्न का निकला नहीं
विधुरको कैसे घरवाली मिले

गिरहकट दे रहा सबको दुआ
किसीकी जेब ना खाली मिले
और सरकार की हसरत यही
मिले राहत मगर जाली मिले

भरोसा अब किसी का क्या करें
मिले जो भी वो मवाली मिले
मेरी बस अर्ज़ इतनी दोस्तों
करू अच्छा नहीं गाली मिले

गया असबाब अब मिलता नहीं
ख़ज़ाने के डकैत रखवाली मिले
सफाई की वही करते हैं बात -
जिनकी जमुनामें जा नाली मिले

एक भी पौद फूलों की नहीं
चमनमें सब हमें माली मिले
गुज़ारे क्या करें हम दोस्तों
करेंसी नोट सब जाली मिले

गटर जैसी नदी बहती रही
नहाते लोग बस खाली मिले
फावड़े ले सभी तो आ गए
न झुग्गी देश में चाली मिले

बोयें क्या एक भी दाना नहीं
जोतते खेत सब हाली मिले
भरोसा अब किसी पर है नहीं
संसदी सन्त सब ठाली मिले

Sunday, December 11, 2016

अंधेरों से रार भी है

रास्ते तकते इरादे -
भटकनों से प्यार भी है .
गलत अंदाज़े लगा मत
घर भी है घरबार भी है .

थोड़ी दिल में है कसक
और थोडा एतबार भी है
मंजिले खोयी कभी ना -
मंजिलों से प्यार भी है .

धूप छाई है जमी पर -
शाम खोयी है यहीं पर
रात की बातें करों मत
यामिनी गद्दार भी है .

चाँद तकता है जहाँ पर
चांदनी फैली कहाँ पर .
उजालों से दोस्ती है -
अंधेरों से रार भी है .