Thursday, May 31, 2018

जुर्माना यारो किसीका भर देखो

दोस्त यारो में एब मत ढूंढों
देखना है तो कोई हुनर देखो

सफ़र में नया सफ़र तलाशो मत
सफ़र में मेरे यार अपना घर देखो

सोचने में कट गयी तमाम उम्र
सोचना क्या कुछतो यार कर देखो

मिले सुकून दिलको आत्मा को भी
जुर्माना यार किसीका भर देखो

दरबदर ठोकरें खाते हो क्यों
गलत लगे कोई दूसरी डगर देखो

महूब्त ठीक तो नहीं साहेब
हर किसीपे हो रहा असर देखो  

जुबां खामोश बोलना दुश्वार लगे
यार की बोलती हुई नज़र देखो

वफ़ा का ढूंढना कहाँ मुश्किल
नज़र में डालकर नज़र देखो

Wednesday, April 25, 2018

ताले की चाबी कितनी हैं

खुली नही इन बाबाओं की
कुत्सित करतूतें जितनी हैं
बाबा की बॉबी कितनी हैं
ताले की चाबी कितनी हैं

बचे रह गए अभी बहुत से
महलनुमा आश्रम बनाये
लम्बी महंगी गाड़ी वाले
ठीक दुपहरी हरम चलाएं

ढूंढो यारो उनको भी तो
पाप करें फिरभी बच जाए
ऐसे छैले अभी अनेकों
हुकूमत हाकिम मीत बनाये

इनके चरण नही वन्दन कर
जिनके आचरण नही सुहाये
बन्द करो गुणगान भगतजी
जो भी चाहे गुरु बन जाये

Sunday, April 22, 2018

पाँव सने कीचड़ में

पाँव सने कीचड़ में यारो
अभी अभी बरसात थमी है
खाते पीते बीत गया दिन
ख़्वाबों में हर रात कटी है

रंग नहीं समर भूमि जग
हाथ मेरे तलवार सही है
चुकता हुए अभी कुछ बाकी 
काल लिए संग हाथ बही है 

किसने धक्का देकर भेजा
लतियाते आये क्या लेकर
क्यों आये थे कब जायेंगे
हर लब ने ये बात कही है

Monday, March 19, 2018

मुस्कुराता भी नहीं हूँ

हूँ बहुत डरपोक अब
उनकी गली जाता नहीं हूँ
लाख बिगड़े बात लेकिन
मैं बनाता भी नहीं हूँ

बात करता भी नहीं 
यूँ बडबडाता भी नहीं हूँ
था कभी मुहजोर लेकिन
अब सताता भी नहीं हूँ

प्यार तुमसे ही किया
पर बताता भी नहीं हूँ
दोस्ती बनती नहीं पर
खार खाता भी नहीं हूँ

पास रहता भी नहीं -
यूँ दूर जाता भी नहीं हूँ
यार हंसने की कहो मत
मुस्कुराता भी नहीं हूँ .

Saturday, March 10, 2018

अब तो बे-तन कर दो राम

दुःख काटे सुख बाँटें मेरे
सहज सलोना वरदो राम
नीला अम्बर मुझे बुलाये
उड़ने वाले "पर" दो राम

अबकी ज्यादा जो चिल्लाएं
चांटा इनको जड़ दो राम
उन्नीस में भी येही जीते
मोदीको ये वरदो राम

झोली भरनी लगे कठिन
तो खोली मेरी भरदो राम
पूरा भाड़ा नहीं भरा तो
आला खाली करदो राम

सुख तो कोरी रही कल्पना
दुनिया से मन भरदो राम
तंग आये तनखा खाके हम
अब तो बे-तन कर दो राम

Thursday, January 11, 2018

डाल पजामा नाड़े में

गर्मी फिरभी कट जाए
धूप मुफ्त ले जाड़े में
जूतोंकी अब मौज नही
चप्पल चली अखाड़े में
इज्जत जाती दिख रही
डाल पजामा नाड़े में

माया ममता कहीं नहीं
साइकिल चलती भाड़े में
गणित हुआ अब फेल सखे
पानी नहीं फुहारे में
पप्पू लिख दे हारे में
मोदी लिख दे सारे में

युवा पीढ़ी क्या कहने
लिखो प्रेम के मारे में
प्यार कोई आसान नहीं
मिले प्रेमिका भाड़े में
भीड़ बड़ी हैरान लगे
नज़रें नहीं नज़ारे में

खतमें खता नहीं लिखना
लिख मत मोदी हारे में
पप्पूजी युवराज बने
लालू बंदी चारे में
खुले छुट्टे सांड फ्री
बंधा आदमी बाड़े में

Sunday, December 17, 2017

अनपढ़ी सी इक कहानी हूँ

अनपढ़ी सी इक कहानी हूँ 
याद दुनियाको मुह्ज़ुबानी हूँ 

जुबांसे कुछ भी कह नहीं पाई 
न कोई लोमड़ी सयानी हूँ 

किसीकी निगाह में हूँ और 
किसीकी निगहबानी हूँ  

करो ना याद आजाउंगी मैं  
तेरे दिलकी अमिट निशानी हूँ